क्या मछली पानी को पहचानती है? शांति का विज्ञान और भीतर की जागृति तुम एक ऐसे समय में जी रहे हो जहाँ लोग अपनी साँसों से ज़्यादा नोटिफिकेशन चेक करते हैं। दुनिया तेज़ है, बेचैन है, और लगातार तुम्हारा ध्यान माँगती रहती है। हर चीज़ “अर्जेंट” है। हर कोई कहीं पहुँचने की जल्दी में है। और इस भागदौड़ के बीच एक अजीब बात हो रही है — लोग पहले से अधिक जुड़े हुए हैं, फिर भी भीतर से पहले से अधिक अकेले महसूस कर रहे हैं। अब एक दिलचस्प सवाल। अगर एक मछली पूरी ज़िंदगी पानी में रहती है, तो क्या वह पानी को नोटिस करती है? शायद नहीं। उसी तरह, तुम भी कई ऐसी धारणाओं में जी रहे हो जिन्हें तुमने कभी सच में परखा ही नहीं। “व्यस्त होना मतलब महत्वपूर्ण होना।” “ज़्यादा पाना मतलब ज़्यादा खुश होना।” “आराम बाद में करेंगे।” ये विचार इतने सामान्य हो चुके हैं कि तुम्हें दिखाई ही नहीं देते। वे तुम्हारे मानसिक वातावरण का हिस्सा बन चुके हैं — ठीक वैसे ही जैसे पानी मछली के लिए। मैं तुमसे किसी पहाड़ की चोटी से बात नहीं कर रहा। मैं तुम्हारे भीतर की उसी शांत चेतना से बात कर रहा हूँ जो हमेशा से मौजूद है। वही जो तुम्हारे विचारों...
मैं डॉ. लाल करुण हूँ। रहस्यमय चेतना वास्तुकार | ब्लॉगर | जीवन प्रशिक्षक | अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त ध्यान विशेषज्ञ | मानव चेतना अनुसंधानकर्ता | पर्यावरण कार्यकर्ता | लेखक | कवि | उद्यमी | बहुभाषी