अपने मन से बदलो अपनी दुनिया अभी प्रस्तावना: भाग्य नहीं, भाव बदलो मेरे प्रिय मित्र, तुमने अक्सर सुना होगा—“मेरी किस्मत ही खराब है”, “घर की हालत ऐसी है, मैं क्या कर सकता हूँ”, “ऊपरवाले ने यही लिखा है।” पर ज़रा ठहरो… अगर तुम्हारी किस्मत इतनी ही फिक्स होती, तो तुम्हारे सपने क्यों बदलते? तुम्हारी इच्छाएँ क्यों जन्म लेतीं? सच यह है कि तुम्हारा जीवन बाहर की परिस्थितियों से नहीं, बल्कि भीतर की धारणा से बनता है। जो तुम बार-बार सोचते हो, महसूस करते हो, और सच मान लेते हो—वही तुम्हारी दुनिया बन जाता है। अब सोचो, अगर मन ही स्क्रिप्ट लिख रहा है, तो तुम ही उसके डायरेक्टर क्यों नहीं बनते? मन की ताकत: वही बनो जो देखना चाहते हो हमारे यहाँ एक कहावत है—“जैसा सोचोगे, वैसा बनोगे।” पर मैं कहता हूँ—जैसा महसूस करोगे, वैसा ही जीओगे। तुम अगर रोज़ यह सोचते हो कि “मेरे पास पैसे कम हैं”, तो तुम्हारा मन उसी कमी का अनुभव पैदा करता रहेगा। लेकिन अगर तुम भीतर से महसूस करो कि “मेरे पास पर्याप्त है, और आता जा रहा है”, तो धीरे-धीरे बाहरी दुनिया भी उसी दिशा में ढलने लगती है। यह कोई जादू नहीं, बल्कि चेतना का विज्ञान है...
मैं डॉ. लाल करुण हूँ। प्रोफेशनल | ब्लॉगर | लाइफ कोच | अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त ध्यान विशेषज्ञ | एबंडेंस मिस्टिक | पर्यावरण कार्यकर्ता | लेखक | कवि | बहुभाषी